भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी उथल-पुथल भरा रहा है। अगर आप निवेशक हैं, तो आज की हेडलाइंस ने निश्चित रूप से आपकी धड़कनें तेज कर दी होंगी। 21 जनवरी, 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई।1 लेकिन यह सिर्फ एक सामान्य गिरावट नहीं है; इसके पीछे वैश्विक राजनीति, व्यापारिक युद्ध (Trade War) की आहट और अमेरिकी बाजारों का ‘खौफ’ छिपा है।
आइए समझते हैं कि आखिर दलाल स्ट्रीट पर यह ‘लाल निशान’ क्यों हावी है और आने वाले समय में आपको किन जोखिमों के लिए तैयार रहना चाहिए।
1. आज का हाल: आंकड़ों की जुबानी
आज सुबह जब बाजार खुला, तो निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
- Sensex: करीब 385 अंकों की गिरावट के साथ 81,794 के स्तर पर खुला और देखते ही देखते 82,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
- Nifty: निफ्टी भी अछूता नहीं रहा और करीब 91 अंकों की कमजोरी के साथ 25,140 के पास जा पहुंचा।
पिछले तीन दिनों में निवेशकों की संपत्ति में लगभग 15 लाख करोड़ रुपये की सेंध लग चुकी है। यह गिरावट इतनी गहरी है कि इसने मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
2. गिरावट के मुख्य विलेन: आखिर ऐसा क्यों हुआ?
वॉल स्ट्रीट का ‘ब्लैक ट्यूसडे’
भारतीय बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी बाजार यानी वॉल स्ट्रीट से आई। मंगलवार को न्यूयॉर्क में डाउ जोंस और नैस्डैक में भारी बिकवाली हुई। जब दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार गिरता है, तो उसका ‘डोमिनो इफेक्ट’ पूरी दुनिया में दिखता है। निवेशकों को डर है कि अमेरिका में मंदी की आहट तेज हो रही है।
ट्रम्प और ट्रेड वॉर का नया अध्याय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।2 विशेष रूप से ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों के साथ बढ़ते विवाद और उन पर टैरिफ (Tariff) लगाने की धमकी ने निवेशकों को डरा दिया है।3 बाजार को डर है कि अगर अमेरिका और यूरोप के बीच ‘ट्रेड वॉर’ छिड़ा, तो वैश्विक सप्लाई चेन ठप हो जाएगी, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
FII की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से अपना पैसा लगातार निकाल रहे हैं।4 अकेले मंगलवार को ही उन्होंने लगभग 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।5 जब बड़े विदेशी खिलाड़ी बाजार से बाहर निकलते हैं, तो बाजार में लिक्विडिटी की कमी हो जाती है और कीमतें गिरने लगती हैं।
3. सेक्टोरल मार: कौन सबसे ज्यादा पिटा?
आज की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव IT और बैंकिंग सेक्टर पर दिखा।
- IT स्टॉक्स: इंफोसिस, TCS और HCL टेक जैसे दिग्गज शेयर नीचे गिरे। चूंकि ये कंपनियां अपनी कमाई के लिए विदेशी बाजारों (खासकर अमेरिका) पर निर्भर हैं, इसलिए वहां की हलचल यहां सीधा असर डालती है।
- बैंकिंग: ICICI बैंक और HDFC बैंक जैसे हैवीवेट्स में बिकवाली ने निफ्टी को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।
4. एक्सपर्ट की राय: क्या यह खरीदारी का मौका है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल जोखिम यानी ‘Downside Risks’ काफी ज्यादा हैं।
“बाजार में अभी अनिश्चितता का माहौल है। जब तक ट्रेड टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) कम नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।” — डॉ. वी.के. विजयकुमार, रणनीतिकार
हालांकि, कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छे शेयरों को निचले स्तर पर जमा करने का एक अवसर हो सकता है, लेकिन ‘Wait and Watch’ की नीति अपनाना फिलहाल समझदारी होगी।
निष्कर्ष: आगे की राह
शेयर बाजार हमेशा सीधी लकीर में नहीं चलता। आज की गिरावट वैश्विक डर का नतीजा है। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों की दिशा ही यह तय करेगी कि आने वाले हफ्तों में हमारा सेंसेक्स रिकवर करेगा या और नीचे जाएगा।
निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे पैनिक में आकर अपनी पूरी होल्डिंग न बेचें, बल्कि अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करें। उतार-चढ़ाव भरे इस दौर में सोना (Gold) एक सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहा है, जिसकी कीमतें रिकॉर्ड स्तर ($4,800/ounce) को पार कर गई हैं।
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